[1]
रागिनी श्रीवास्तव, “प्रेमचंद के कथा साहित्य में दलित चेतना और सामाजिक न्यायः एक समालोचनात्मक अध्ययन”, IJARMS, vol. 1, no. 1, pp. 274–294, Jan. 2018.