लैंगिक समानता एवं सशक्तिकरणः एक विश्लेषण
Abstract
यह शोध पत्र लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की अवधारणा को समझाने का प्रयास करता है, जो वर्तमान समय में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के मुख्य आधार हैं। लैंगिक समानता का उद्देश्य पुरुषों और महिलाओं को समान अवसर, अधिकार और गरिमा प्रदान करना है, ताकि वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से भागीदारी कर सकें। महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निर्णय लेने की क्षमता, आत्म-सम्मान और सामाजिक न्याय की प्राप्ति भी शामिल है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में संविधान ने अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से समानता का अधिकार सुनिश्चित किया है, जबकि पंचायती राज व्यवस्था में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण ने स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया है। इससे समाज में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यह शोध पत्र लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक और विधिक पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करता है। इसके साथ ही यह भी दर्शाता है कि कैसे शिक्षा, जागरूकता और नीति निर्माण के माध्यम से एक न्यायपूर्ण और समानतामूलक समाज की स्थापना की जा सकती है। इस प्रक्रिया से महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पूरे समाज में समानता का संवर्धन हो सकता है, जो समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में सहायक सिद्ध होगा।
मुख्य शब्द:लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण,सामाजिक न्याय, समान अवसर, शिक्षा
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