आश्रम व्यवस्थाः प्राचीन भारतीय सामाजिक अनुशासन और आधुनिक जीवन-शैली में उसकी प्रासंगिकता

Authors

  • डॉ श्वेता शर्मा

Abstract

आश्रम-व्यवस्था प्राचीन भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण और सुविचारित जीवन-पद्धति है, जिसमें मानव जीवन को चार क्रमिक चरणों, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासकृमें विभाजित किया गया है। इसका मूल उद्देश्य जीवन को अनुशासित, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाना है, ताकि व्यक्ति भौतिक उन्नति के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक विकास भी कर सके। शास्त्रीय परंपरा में मानव जीवन को आदर्शतः शतायु मानते हुए प्रत्येक आश्रम के लिए लगभग पच्चीस वर्षों का काल निर्धारित किया गया, जिससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चार पुरुषार्थों की क्रमिक एवं संतुलित पूर्ति संभव हो सके। आश्रम-व्यवस्था का मूल आधार धर्म की संदर्भगत अवधारणा है, जिसके अनुसार जीवन के प्रत्येक चरण में व्यक्ति के कर्तव्य उसकी अवस्था और परिस्थितियों के अनुरूप बदलते रहते हैं। आधुनिक संदर्भ में आश्रम-व्यवस्था की प्रासंगिकता और भी स्पष्ट हो जाती है। ब्रह्मचर्य आश्रम के सिद्धांत ज्ञानार्जन, आत्म-संयम और अनुशासन आज की शिक्षा प्रणाली में अत्यंत आवश्यक हैं, जहाँ सूचना-अधिक्य और तकनीकी विचलन के कारण एकाग्रता और नैतिक मूल्यों का ह्रास देखा जा रहा है। गृहस्थ आश्रम का आदर्श कार्य-जीवन संतुलन, पारिवारिक उत्तरदायित्व और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से आधुनिक समाज में बढ़ते तनाव, बर्नआउट और पारिवारिक विघटन की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। वानप्रस्थ आश्रम का महत्व आधुनिक जीवन में मध्यावस्था के आत्मचिंतन, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गति में संतुलन स्थापित करने में निहित है। इसी प्रकार संन्यास आश्रम का आधुनिक अर्थ बाह्य त्याग नहीं, बल्कि आंतरिक वैराग्य, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का विकास है, जिसे योग, ध्यान और सेवा-आधारित आंदोलनों में देखा जा सकता है। इस प्रकार आश्रम-व्यवस्था अपने मूल सिद्धांतों के साथ आज भी मानव जीवन को संतुलित, नैतिक और सार्थक बनाने की दिशा प्रदान करती है।
मुख्य शब्द- आश्रम व्यवस्था, प्राचीन भारतीय सामाजिक अनुशासन, ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम, संन्यास आश्रम, नैतिक व आध्यात्मिक मूल्य, कर्तव्य, आत्मसंयम,ं सामाजिक उत्तरदायित्व, आधुनिक जीवन-शैली, संतुलित जीवन-दृष्टि, भारतीय सांस्कृतिक परंपरा, समकालीन समाज में प्रासंगिकता

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Published

31-01-2026

How to Cite

1.
डॉ श्वेता शर्मा. आश्रम व्यवस्थाः प्राचीन भारतीय सामाजिक अनुशासन और आधुनिक जीवन-शैली में उसकी प्रासंगिकता. IJARMS [Internet]. 2026 Jan. 31 [cited 2026 Feb. 10];9(01):108-12. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/837

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Articles