माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की नैराश्य भावना का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन

Authors

  • 1डॉ0 कौशलेन्द्र कुमार यादव

Abstract

मनुष्य ईश्वर की सर्वोकृष्ट कृति है वह समाज में रहकर स्वयं का एवं समाज क विकास करता रहता है इसके लिए वह शिक्षा प्राप्त करता है। शिक्षाविहीन समाज के विकसित राष्ट्र की कल्पना करना किसी भी देश के लिए सम्भव नहीं है। शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास हो पाना सम्भव है। मनुष्य जन्म से लेकर अपने अस्तित्व को धूमिल होने तक शिक्षारत रहता है।
हमारे आस-पास का वातावरण तीव्रगति से निरन्तर परिवर्तित हो रहा है परिवर्तन की यह गति इतनी तीव्र है कि कभी-कभी परिवर्तनों के साथ अनुकूलन करना कठिन हो जाता है। वर्तमान युग में जीवन व्यतीत करने की आवश्यकताओं ने हमें सभ्य जीवन व्यतीत करने के लिए प्रतिदिन बढ़ते मूल्यों, नवयुवकों की बेराजेगारी तथा आए दिन होने वाली हिंसाओं से स्वयं की रक्षा करना कठिन हो गया है। इस प्रकार कीसमस्याओं के कारण हमें अपने मस्तिष्क का सन्तोषजनक सन्तुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है। अतः यह घटनाक्रम तनाव की अवस्था में ले जाकर असहाय बना देता है।
मुख्य शब्द- माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की नैराश्य भावना, शैक्षिक उपलब्धि, प्रभाव, अध्ययन।

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Published

31-01-2022

How to Cite

1.
1डॉ0 कौशलेन्द्र कुमार यादव. माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की नैराश्य भावना का उनकी शैक्षिक उपलब्धि पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन. IJARMS [Internet]. 2022 Jan. 31 [cited 2026 Apr. 4];5(1):84-91. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/214

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