शारीरिक शिक्षा का विद्यार्थियों के समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव एक समग्र अनुसंधान अध्ययन

Authors

  • डॉ0 राकेश कुमार तिवारी

Abstract

शारीरिक शिक्षा विद्यार्थियों के समग्र स्वास्थ्य जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक आयाम सम्मिलित हैं, के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वर्तमान समय में तकनीकी निर्भरता, निष्क्रिय जीवनशैली, शैक्षणिक दबाव तथा प्रतिस्पर्धा के कारण विद्यार्थियों में शारीरिक असंतुलन, मानसिक तनाव और सामाजिक कौशल की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में प्रस्तुत शोध का उद्देश्य शारीरिक शिक्षा के नियमित अभ्यास का विद्यार्थियों के समग्र स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में मिश्रित शोध पद्धति (मात्रात्मक एवं गुणात्मक) का उपयोग करते हुए प्रश्नावली, साक्षात्कार तथा अवलोकन के माध्यम से डेटा एकत्र किया गया। निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि नियमित शारीरिक शिक्षा से विद्यार्थियों की शारीरिक फिटनेस, सहनशक्ति, रोग-प्रतिरोधक क्षमता तथा मोटर कौशल में उल्लेखनीय सुधार होता है। साथ ही, यह मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करते हुए तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक सिद्ध होती है। सामाजिक दृष्टि से शारीरिक शिक्षा टीम भावना, सहयोग, नेतृत्व क्षमता एवं आत्म-विश्वास को बढ़ाती है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र व्यक्तित्व विकसित होता है। अतः यह अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि शारीरिक शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का एक विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वस्थ, संतुलित एवं सक्रिय जीवन के निर्माण का आधार है। शैक्षणिक संस्थानों में शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य एवं प्रभावी रूप से लागू करना समय की अनिवार्यता है।
प्रमुख्य शब्द- शारीरिक शिक्षा, समग्र स्वास्थ्य, विद्यार्थी, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्वास्थ्य।

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Published

31-07-2025

How to Cite

1.
डॉ0 राकेश कुमार तिवारी. शारीरिक शिक्षा का विद्यार्थियों के समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव एक समग्र अनुसंधान अध्ययन. IJARMS [Internet]. 2025 Jul. 31 [cited 2026 Feb. 11];8(02):190-202. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/818

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