आधुनिक रोगों की रोकथाम में पारंपरिक जीवन शैली की भूमिका

Authors

  • डॉ. शारदा भिंडे

Keywords:

मुख्य शब्द- पारंपरिक आहार, योग एवं प्राणायाम, आयुर्वेदिक जीवनशैली, प्राकृतिक चिकित्सा, संतुलित दिनचर्या, मानसिक स्वास्थ्य एवं ध्यान, शारीरिक सक्रियता, रोग प्रतिरोधक क्षमता

Abstract

वर्तमान समय में विज्ञान और तकनीक के अभूतपूर्व विकास ने मानव जीवन को अत्यधिक सुविधाजनक बना दिया है। आधुनिक जीवनशैली के कारण लोगों के कार्य करने के तरीके, खान-पान की आदतें और दैनिक दिनचर्या में व्यापक परिवर्तन आए हैं। इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप अनेक नई स्वास्थ्य समस्याएँ और रोग उत्पन्न हुए हैं, जिन्हें सामान्यतः “आधुनिक रोग” या “जीवनशैली जनित रोग” कहा जाता है। इनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग, तनाव, अनिद्रा तथा मानसिक विकार जैसे रोग प्रमुख हैं। इन रोगों का मुख्य कारण अनियमित दिनचर्या, असंतुलित आहार, शारीरिक श्रम की कमी, अत्यधिक मानसिक तनाव तथा प्रकृति से दूर होती जीवन शैली है।

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Published

31-01-2026

How to Cite

1.
डॉ. शारदा भिंडे. आधुनिक रोगों की रोकथाम में पारंपरिक जीवन शैली की भूमिका. IJARMS [Internet]. 2026 Jan. 31 [cited 2026 Mar. 23];9(01):191-7. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/857

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Articles