उच्च शिक्षा का उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण

Authors

  • डॉ. सौरभ सिंह

Keywords:

संकेत शब्द:- उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण

Abstract

आज का युग वैश्वीकरण का युग है, जिसनें व्यक्ति, समाज व राष्ट्र को सभी क्षेत्रों में प्रभावित किया है। व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की प्रगति का अन्दाजा उसकी शिक्षा व्यवस्था से लगाया जा सकता है। यदि किसी देश को बर्बाद करना है तो उसकी शिक्षा व्यवस्था को नष्ट कर दीजिए वह देश स्वतः ही नष्ट/बर्बाद हो जायेगा। किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था में उच्च शिक्षा का वही स्थान होता है, जो मानव शरीर में हृदय का होता है। उच्च शिक्षा का तात्पर्य 10़2 के बाद महाविद्यालयों या विश्वविद्यालयों में दी जाने वाली शिक्षा से है, जो ज्ञान का उत्पादन व प्रसारण करती है। लेकिन बदलाव के इस दौर में विश्वविद्यालय ज्ञान के उत्पादन के एकाधिकार के साथ-साथ समाज में अपना विशिष्ट स्थान भी खोते जा रहे हैं। सहपाठी समूह व स्व-अध्ययन का चलन बढ़ता जा रहा है, केवल विश्वविद्यालय ही ज्ञानार्जन ध् सीखने के स्रोत नहीं रहे और न वह सभी की आजीवन सतत् शिक्षा, तकनीकी क्षमता व व्यवसायिक प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उठा सकते हैं। अत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उदारीकरण, निजीकरण व भूमण्डलीकरण को लागू करने हेतु भारत सरकार को बदलते वैश्विक परिदृश्य में उचित नीति का निर्धारण कर, लचीली प्रगतिशील शिक्षा व्यवस्था अपनाने, सृजनात्मक विचारों को बढ़ावा देने, उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण व बाजारीकरण को कानून बनाकर रोकने, शैक्षिक, सामाजिक व आर्थिक विषमता कम करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की पहुंच जनसामान्य तक सुनिश्चित करने, उच्च शिक्षा के प्रसारण व उचित प्रबन्धन हेतु सार्वजनिक निजी भागीदारी (च्च्च्) मॉडल को सावधानीपूर्वक लागू करने की आवश्यकता है।
संकेत शब्द:- उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण

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Published

31-07-2025

How to Cite

1.
डॉ. सौरभ सिंह. उच्च शिक्षा का उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण. IJARMS [Internet]. 2025 Jul. 31 [cited 2026 Mar. 26];8(02):203-8. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/858

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