विकसित भारत 2047 में लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय
Abstract
21 वीं सदी में भारत एक तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति के रूप में विकसित हो रहा है । भारत को विकसित देश बनाने में लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है। लैंगिक समानता का अर्थ है सभी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को समान अधिकार, अवसर और संसाधनों तक समान पहुँच प्राप्त हो। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को अपनी इच्छा से जीवन जीने और निर्णय लेने के लिए शक्ति और साधन प्रदान करना। लैंगिक समानता के लिए महिला सशक्तिकरण आवश्यक है। लैंगिक समानता विकास को बढ़ावा देती है। सामाजिक न्याय का अर्थ है समाज के सभी सदस्यों को बुनियादी अधिकार, समान अवसर और उचित संसाधन प्रदान किए जाएं चाहे उनकी सामाजिक, धार्मिक या सांस्कृतिक पृष्ठिभूमि कुछ भी हो। सामाजिक न्याय का उद्देश्य भेदभाव को खत्म करना और एक ऐसा वातावरण बनाना है जहां सभी लोग अपनी क्षमता का पूरा उपयोग कर सकें। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष कार्यक्रम मार्च 2025 में बताया कि देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं । रुचिरा कंबोज ने बताया कि महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय से भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा।
मुख्य शब्द- लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, संयुक्त राष्ट्र, प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुद्रा योजना।
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