विकसित भारत के निर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिकाः एक विवेचनात्मक अध्ययन

Authors

  • डॉ. राजबहादुर मौर्य

Abstract

भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। बेशक सरकार और सरकारी उद्यम इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताक़त और क्षमता लगा देंगे। हम सभी इस बात से वाक़िफ़ हैं कि भारत विश्व की एक बड़ी अर्थव्यवस्था बन रही है। बावजूद इसके हमें विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास को गति देने की आवश्यकता है। बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा करने की ज़रूरत है। निरंतर देश में नवाचार को प्रोत्साहित करना और लोगों को उससे जोड़ना होगा। बड़े उद्योगों के साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों में उत्पादन बढ़ाना होगा। वैश्विक बाज़ार में अपने निर्यात को बढ़ावा देना होगा। ज़ाहिर तौर पर इस तीव्र विकास और उत्पादन को भारी निवेश की ज़रूरत होगी और यह काम बिना निजी निवेश और भागीदारी के सम्भव नहीं होगा। सार्वजनिक- निजी भागीदारी के माध्यम से बुनियादी ढाँचे के विकास में निजी क्षेत्र की अहम भूमिका होगी और रहेगी।
मुख्य शब्द- विकसित भारत, विनिर्माण, निजी क्षेत्र, विकसित राष्ट्र, आर्थिक विकास, वैश्विक बाज़ार

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Published

30-11-2025

How to Cite

1.
डॉ. राजबहादुर मौर्य. विकसित भारत के निर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिकाः एक विवेचनात्मक अध्ययन. IJARMS [Internet]. 2025 Nov. 30 [cited 2026 Apr. 27];8:122-30. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/888