वर्ण व्यवस्था से जाति-व्यवस्था का विकास
Abstract
भारतीय समाज में जाति व्यवस्था एक दीर्घकालिक सामाजिक संस्था रही है, जिसका स्वरूप समय के साथ व्यापक परिवर्तन से गुजरा है। 12 वीं शताब्दी भारतीय इतिहास में संक्रमण का युग माना जाता है. जहाँ एक और धर्मशास्त्रीय परंपरायें अपने चरम पर थीं, वहीं दूसरी ओर तुर्क-अफगान आक्रमणों और नये राजनीतिक सामाजिक सम्पर्काे ने जाति व्यवस्था को नए रूप में परिवर्तित किया। प्रस्तुत शोध सर्वेक्षण में 12वीं शताब्दी के पूर्व और पश्चात् भारतीय जाति संरचना की तुलना की गयी है, जिसमें वर्णव्यस्था से जाति-व्यवस्था में क्रमिक परिवर्तन, पेशागत स्थिरता, अस्पृश्यता का उभार तथा कई नवीन उपजातियों का निर्माण तथा वर्तमान समय में जाति व्यवस्था का क्या स्वरूप दृष्टिगोचर होता है, इत्यादि कारण परिणामों का विश्लेषण शामिल है।
मुख्य शब्द- वर्ण व्यवस्था, जाति-व्यवस्था, सामाजिक स्तरीकरण, जन्म आधारित असमानता, कर्म से जन्म का परिवर्तन, सामाजिक गतिशीलता का अभाव, धार्मिक एवं सांस्कृतिक आधार, पेशागत विभाजन
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