प्रेमचंद के कथा साहित्य में दलित चेतना और सामाजिक न्यायः एक समालोचनात्मक अध्ययन
Abstract
हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान सामाजिक यथार्थवादी साहित्यकार के रूप में सर्वाेपरि है। उन्होंने भारतीय समाज की जटिल सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संरचनाओं का अत्यंत संवेदनशील और यथार्थपरक चित्रण किया। विशेष रूप से उनके कथा साहित्य में दलित, शोषित, वंचित तथा हाशिए पर स्थित वर्गों के जीवन-संघर्ष, सामाजिक अपमान, आर्थिक विषमता, जातिगत भेदभाव तथा मानवीय गरिमा के प्रश्नों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्ति मिली है। प्रेमचंद ने ऐसे समय में दलित जीवन की पीड़ा को साहित्य का विषय बनाया, जब भारतीय समाज कठोर जाति-व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं से ग्रस्त था। उनकी रचनाएँ केवल सामाजिक यथार्थ का चित्रण नहीं करतीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकार, नैतिकता तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना का भी सशक्त संदेश देती हैं।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य प्रेमचंद के कथा साहित्य में निहित दलित चेतना तथा सामाजिक न्याय की अवधारणा का आलोचनात्मक विश्लेषण करना है। अध्ययन में विशेष रूप से सद्गति, ठाकुर का कुआँ, दूध का दाम, कफन, मंदिर, गोदान, कर्मभूमि तथा रंगभूमि जैसी प्रमुख कृतियों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रेमचंद का दृष्टिकोण समकालीन दलित विमर्श से किस सीमा तक सामंजस्य रखता है तथा कहाँ उसकी सीमाएँ दिखाई देती हैं। यह अध्ययन गुणात्मक एवं व्याख्यात्मक शोध पद्धति पर आधारित है। सामग्री संकलन के लिए प्रेमचंद की मूल कृतियों, आलोचनात्मक ग्रंथों, शोध-पत्रों, पुस्तकों तथा संबंधित द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया जाएगा। विषयवस्तु विश्लेषण तथा तुलनात्मक पद्धति के माध्यम से कथा-साहित्य में निहित दलित जीवन, जातिगत संरचना, सामाजिक न्याय, समानता, शोषण तथा प्रतिरोध के स्वर का विश्लेषण किया जाएगा। अध्ययन से यह स्पष्ट होने की संभावना है कि प्रेमचंद ने भारतीय समाज में व्याप्त जातिगत अन्याय को साहित्य के माध्यम से चुनौती दी तथा सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। यद्यपि उनका दृष्टिकोण आधुनिक दलित साहित्य की वैचारिक आक्रामकता से भिन्न है, फिर भी सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा और समान अवसर की स्थापना के लिए उनका साहित्य आज भी अत्यंत प्रासंगिक एवं प्रेरणास्रोत है।
प्रमुख शब्द- प्रेमचंद, दलित चेतना, सामाजिक न्याय, जाति व्यवस्था, सामाजिक यथार्थ, मानवाधिकार, समानता, कथा साहित्य, हिंदी साहित्य, सामाजिक परिवर्तन।
Additional Files
Published
How to Cite
Issue
Section
License
Copyright (c) 2018 IJARMS JOURNAL

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
WWW.IJARMS.ORG