जलवायु परिवर्तन के निराकरण में हरित ऊर्जा की प्रभावी भूमिका

Authors

  • प्रोफेसर शशिप्रभा तोमर

Abstract

जलवायु परिवर्तन विश्व की सर्वाधिक ज्वलन्त समस्या है। तापमान में भयंकर परिवर्तन, ऋतु परिवर्तन अर्थात् शीतकाल में ग्रीष्मता तथा ग्रीष्मकाल में शीत की अनुभूति ही जलवायु परिवर्तन है। यह प्रकृति के लिए एक चेतावनी है। मानवता के विकास के साथ-साथ भूमंडलीय तापमान में निन्तर वृद्धि हो रही है। जलवायु परिवर्तन विभिन्न संक्रामक रोगों हृदयरोग, फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक, निमोनिया आदि के लिए भी उत्तरदायी है। समुद्री तरंगें, ज्वालामुखी विस्फोट, महाद्वीपों का खिसकना एवं पृथ्वी का झुकाव इसके प्रमुख कारक हैं। तापमान में वृद्धि व्यक्तियों के साथ-साथ जानवरों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इससे फसलों की उत्पादकता भी प्रभावित होती है। हजारों वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में गम्भीरता पूर्वक गहन विश्लेषण कर इसके विनाशकारी दुष्प्रभावों के प्रति चिन्ता अभिव्यक्त की है। यहाँ तक कि व्यक्ति न्यायालय की भी शरण ले रहा है। जलवायु परिवर्तन के निराकरण में हरित ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके प्रमुख स्रोतों में सौर-ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत एवं भूतापीय ऊर्जा महत्वपूर्ण है। समय-समय पर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेकानेक योजनाओं को निर्मित किया गया। पवन ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की गई। राष्ट्रीय कार्य योजना (छ।च्ब्ब्) को आठ राष्ट्रीय मिशन कोर के रुप में लागू किया गया। वास्तव में जलवायु परिवर्तन मानवजन्य भयावह समस्या है। यथासंभव वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग श्रेयस्कर है। हरित ऊर्जा एक ऐसा प्रभावकारी उपाय है, जिससे एक सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुदृण भविष्य का निर्माण संभव है।
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Published

30-11-2025

How to Cite

1.
प्रोफेसर शशिप्रभा तोमर. जलवायु परिवर्तन के निराकरण में हरित ऊर्जा की प्रभावी भूमिका. IJARMS [Internet]. 2025 Nov. 30 [cited 2026 Apr. 6];8:41-4. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/862