भारतीय नारी शिक्षा की सामाजिक बाधाएंः एक समाजशास्त्रीय विवेचन

Authors

  • डॉ0 शालिनी सोनी

Abstract

नारी शिक्षा किसी भी समाज के समग्र विकास का मूल आधार है, किंतु भारतीय समाज सहित विश्व के अनेक भागों में इसके मार्ग में विविध सामाजिक बाधाएँ विद्यमान हैं। प्रस्तुत शोधपत्र में नारी शिक्षा के समक्ष उपस्थित प्रमुख सामाजिक अवरोधों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में पितृसत्तात्मक व्यवस्था, लैंगिक भेदभाव, आर्थिक विषमता, बाल विवाह, पारंपरिक मान्यताएँ, सुरक्षा संबंधी चिंताएँ तथा शैक्षिक अवसंरचना की कमी जैसे कारकों को प्रमुख बाधाओं के रूप में रेखांकित किया गया है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार ये अवरोध न केवल महिलाओं की शिक्षा को प्रभावित करते हैं, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण में भी बाधा उत्पन्न करते हैं। यह शोध गुणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा द्वितीयक स्रोतों जैसे पुस्तकों, शोधपत्रों, सरकारी रिपोर्टों एवं विभिन्न सर्वेक्षणों का विश्लेषण करता है। अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत करते हैं कि नारी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए सामाजिक चेतना, नीतिगत हस्तक्षेप, तथा सामुदायिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। अंततः, शोध यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि नारी शिक्षा में सुधार के बिना सतत एवं समावेशी विकास की कल्पना अधूरी है।
कुंजी शब्द - नारी शिक्षा, सामाजिक बाधाएँ, पितृसत्ता, लैंगिक भेदभाव, बाल विवाह, सामाजिक असमानता, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा का समाजशास्त्र

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Published

31-05-2019

How to Cite

1.
डॉ0 शालिनी सोनी. भारतीय नारी शिक्षा की सामाजिक बाधाएंः एक समाजशास्त्रीय विवेचन. IJARMS [Internet]. 2019 May 31 [cited 2026 Apr. 11];2(2):285-9. Available from: https://journal.ijarms.org/index.php/ijarms/article/view/868

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